Sunday, 08 December 2019, 3:07 AM

जीवन मंत्र

सहन करना सीखें

Updated on 7 November, 2019, 6:00
व्यक्ति स्वयं ही बेचैनी का जीवन जीता है और अकारण ही जीवन में अनेक कष्टों को आमंत्रित कर लेता है। एक आदमी था। वह सदा प्रसन्न रहता था। एक दिन उसको उदास देखकर मित्र ने पूछा, मित्र! तुम सदा प्रसन्न रहते थे। तुम्हारी सारी अनुकूलताएं थीं। पर आज तुम बहुत... Read More

प्रार्थना की शक्ति का महत्व... 

Updated on 6 November, 2019, 6:00
मनुष्य का जीवन उसकी शारीरिक एवं प्राणिक सत्ता में नहीं, अपितु उसकी मानसिक एवं आध्यात्मिक सत्ता में भी आकांक्षाओं तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और कामनाओं का है। जब उसे ज्ञान होता है कि एक महत्तर शक्ति संसार को संचालित कर रही है, तब वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति... Read More

जीवन का संघर्ष

Updated on 5 November, 2019, 6:00
एक दिन एक व्यक्ति बहुत परेशान लग रहा था। मित्र ने पूछा- क्या बात है? आज इतने परेशान क्यों हो?   उसने कहा- मैं बहुत मुसीबत में फंस गया हूं।   मित्र बोला- तुम्हारी क्या मुसीबत हो सकती है? तुम्हारे दोनों लड़के संपन्न हैं। खूब धन कमा रहे हैं। तुम्हें किस बात... Read More

गहराई में जाएं

Updated on 4 November, 2019, 6:00
गुरू के पास तीन शिष्य आए, बोले, गुरूदेव! हम साधना करना चाहते हैं। कोई साधना का सूत्र बताएं। गुरू ने सोचा, साधना का सूत्र बताने से पहले परीक्षा कर ली जाए। गुरू ने तीनों से एक प्रश्न पूछा, आंख और कान में कितना अंतर है। पहला व्यक्ति बोला, चार अंगुल... Read More

कोई भी परिस्थिति हो, ये काम कभी बंद ना करें..

Updated on 3 November, 2019, 6:00
अपने विचारों का मूल्यांकन करना कभी भी बंद न करें, क्योंकि विचारों का प्रवाह अनवरत और कभी-कभी अत्यधिक भी हो जाता है। हर नया विचार पुराने को चुनौती देता है। यहीं से भ्रम भी पैदा होता है और कभी-कभी अधिक विचार आने से निर्णय भी गलत हो जाते हैं। रावण... Read More

विश्वास की ताकत

Updated on 2 November, 2019, 6:00
एक अंग्रेज अफसर अपनी नवविवाहिता पत्नी के साथ जहाज में सवार होकर सफर पर निकला। रास्ते में समुद्र में जोर का तूफान आया। मुसाफिर घबरा उठे। पर वह अंग्रेज अफसर जरा भी नहीं घबराया। उसकी पत्नी भी व्याकुल हो गई थी। उसने अपने पति से पूछा-इतना खतरनाक तूफान आया है।... Read More

व्यक्ति-निर्माण समाज पर निर्भर 

Updated on 1 November, 2019, 6:00
व्यक्ति का निर्माण केवल उसी पर नहीं, बहुत कुछ अंशों में समाज पर निर्भर है।इसलिए उसे अपने निर्माण को समाज के निर्माण में देखना है। सफलता का पहला सूत्र है- मूल्यों का परिवर्तन। समाज का निर्माण मूल्यों के परिवर्तन से ही होता है। स्वार्थ और संग्रह, ये दोनों मूल्य जब... Read More

मरने के बाद कहां जाता है इंसान

Updated on 31 October, 2019, 6:00
सभी धर्मों में पुनर्जन्म की बात कही गयी है, यानी एक शरीर को छोड़ने के बाद इंसान दूसरे शरीर में प्रवेश करता है। लेकिन मृत्यु के बाद से पुनर्जन्म लेने तक जीव कहां रहती है यह एक बड़ा सवाल है। भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में कहा है कि... Read More

खुद तय करें कि अगले जन्म में क्या बनेंगे 

Updated on 30 October, 2019, 6:00
अगले जन्म में आप धनवान बनेंगे या गरीब, एक्टर बनेंगे या डॉक्टर यह सब आप पर निर्भर है। हो सकता है कि आप इस पर यकीन न करें लेकिन सच यही है। इसका प्रमाण है श्रीमद्भगवत् गीता। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि आत्मा अमर है। एक शरीर... Read More

सुखी रहना है तो ईश्वर से शिकायत न करें 

Updated on 29 October, 2019, 6:00
इंसानों की एक सामान्य आदत है कि तकलीफ में वह भगवान को याद करता है और शिकायत भी करता है कि यह दिन उसे क्यूं देखने पड़ रहे हैं। अपने बुरे दिन के लिए इंसान सबसे ज्यादा भगवान को कोसता है। जब भगवान को कोसने के बाद भी समस्या से... Read More

स्वस्थ समाज के लिए करें आत्म जागरण 

Updated on 27 October, 2019, 6:00
पिछले कुछ समय से अध्यात्म के क्षेत्र में बाजारवाद का प्रभाव बढ़ा है। इसी वजह से अध्यात्म के क्षेत्र में भी अवमूल्यन हुआ है। अत: स्वस्थ समाज के लिए आत्म जागरण जरूरी है। जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद के अनुसार अध्यात्म के क्षेत्र में बाजारवाद ने प्रभाव डाला है और यह... Read More

ईश्वर की कृपा बुद्धि से ही प्राप्त होती है 

Updated on 25 October, 2019, 6:00
योग में आसन, प्राणायाम, मुद्रा और आहार-विहार आदि पर तो बहुत शोध हुए हैं, अब ध्यान और मुद्रा की बारी है। इस विधा के अनुसार शांत मस्तिष्क ऊर्जा का केंद्र है तो निर्मल मन शांति और स्थिरता का। शास्त्रों  में इन केंद्रों की उपमा ब्रह्मलोक और क्षीर सागर से दी... Read More

 अहंकार त्यागने वाले ही महापुरूष होते हैं 

Updated on 23 October, 2019, 6:00
बहुत से लोग दिन-रात प्रयास करते हैं कि उन्हें किसी तरह उच्च पद मिल जाए। खूब सारा पैसा हो और आराम की जिन्दगी जियें। जब ये सब प्राप्त हो जाता है तो इसे ईश्वर की कृपा मानने की बजाय अपनी काबिलियत और धन पर इतराने लगते हैं। जबकि संसार में... Read More

भगवान का सबसे प्रिय आहार अहंकार

Updated on 21 October, 2019, 6:30
अहंकार शब्द बना है अहं से, जिसका अर्थ है 'मैं'। जब व्यक्ति में यह भावना आ जाती है कि 'जो हूं सो मैं, मुझसे बड़ा कोई दूसरा नहीं है' तभी व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है। द्वापर युग में सहस्रबाहु नाम का राजा हुआ। इसे बल का इतना अभिमान... Read More

 जीवन का अर्थ बताती है अर्थी 

Updated on 20 October, 2019, 6:00
जीवन भर व्यक्ति इसी सोच में उलझा रहता है कि उसका परिवार है, बीबी बच्चे हैं। इनके लिए धन जुटाने और सुख-सुविधाओं के इंतजाम में हर वह काम करने के लिए तैयार रहता है जिससे अधिक से अधिक धन और वैभव अर्जित कर सके। अपने स्वार्थ के लिए व्यक्ति दूसरों... Read More

दान और परोपकार से घटता नहीं है धन 

Updated on 19 October, 2019, 6:00
सभी धर्मों में कहा गया है कि दान करो। दान करने से धन घटता नहीं है बल्कि आपका धन बढ़ता है। लेकिन समस्या यह है कि लोग धन बढ़ने का तात्पर्य यह समझते हैं कि आज आप सौ रूपये कमाते हैं तो कल हजार रूपये कमाने लगेंगे। शास्त्रों में मुद्रा... Read More

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

Updated on 16 October, 2019, 6:00
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास... Read More

 द्वंद्व के बीच शांति की खोज  

Updated on 15 October, 2019, 6:00
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ।   जब कोई व्यक्ति तुम्हें नकारात्मक बातें कहे, तो उसे वहीं रोक दो, उस पर वास भी मत करो। यदि कोई तुम पर कुछ आरोप लगाये, तो उस पर वास न करो। यह जान... Read More

श्रद्धा के मुताबिक पूजा

Updated on 14 October, 2019, 6:00
हरेक व्यक्ति में चाहे वह जैसा भी हो, एक विशेष प्रकार की श्रद्धा पाई जाती है। लेकिन उसके द्वारा अर्जित स्वभाव के अनुसार उनकी श्रद्धा उत्तम (सतोगुणी), राजस (रजोगुणी) अथवा तामसी कहलाती है। अपनी श्रद्धा के अनुसार ही वह कतिपय लोगों से संगति करता है। अब वास्तविक तथ्य तो यह... Read More

सिद्धांत गौण है, सत्ता प्रमुख 

Updated on 13 October, 2019, 6:00
पिछले दिनों में राष्ट्रीय रंगमंच पर जिस प्रकार का राजनीतिक चरित्र उभरकर आ रहा है, वह एक गंभीर चिंता का विषय है। ऐसा लगता है, राजनीति का अर्थ देश में सुव्यवस्था बनाए रखना नहीं, अपनी सत्ता और कुर्सी बनाए रखना है। राजनीतिज्ञ का अर्थ उस नीति-निपुण व्यक्तित्व से नहीं है,... Read More

सुखी रहने के लिए लें धर्म की शरण! 

Updated on 11 October, 2019, 6:00
दुनिया का हर व्यक्ति केवल सुख ही चाहता है। दुख से सब दूर भागते हैं। यदि हमें सुखी रहना है तो सबसे पहले धर्म से जुड़ना होगा। किसी के मन को दुखाना भी पाप है। भागदौड़ भरी जिंदगी में आज हर व्यक्ति विवेक नहीं रख पाता है। इसलिए पाप बंध... Read More

इन लोगों से नहीं लें सलाह  

Updated on 10 October, 2019, 7:00
महात्मा विदुर महाभारत काल के महान नीतिज्ञ माने जाते हैं इन्हें धर्मराज का अवतार भी माना जाता है। इन्होंने हमेशा नीतियों और न्याय का पालन किया। इन्होंने अपनी नीतियों में बताया है कि मनुष्य को कोई भी काम शांति और समझदार लोगों की सलाह से करना चाहिए। वहीं भूलकर भी... Read More

क्या है जीवन का सार 

Updated on 8 October, 2019, 6:00
दुख एक मानसिक कल्पना है। कोई पदार्थ, व्यक्ति या प्रिया दुख नहीं है। संसार के सब नाम-रूप गधा-हाथी, स्त्री-पुरुष, पशु-पक्षी, वृक्ष-लता आदि खिलौने हैं। हम अपने को खिलौना मानेंगे तो गधा या हाथी होने का सुख-दुख होगा, अपने को स्वर्ण, मूल्यधातु देखेंगे तो यह मनुष्य देह नहीं रहेंगे। हम विराट्... Read More

कौन है नीतिनिष्ठ व्यक्ति? 

Updated on 7 October, 2019, 6:15
सदाचार एक व्यापक और सार्वभौम तत्व है। देशकाल की सीमाएं इसे न तो विभक्त कर सकती हैं और न इसकी मौलिकता को नकार सकती हैं।  जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश सबके लिए होता है, उसी प्रकार सदाचार के मूलभूत तत्व मानव मात्र के लिए उपयोगी होते हैं। कुछ व्यक्ति अपने... Read More

क्या है शुद्ध अहिंसा! 

Updated on 6 October, 2019, 6:15
गांधी जी ने अपने जीवन में अहिंसा के विविध प्रयोग किए। वे एक वैज्ञानिक थे। उनका जीवन प्रयोगशाला था। उनका प्रारंभिक और अंतिम साहित्य देखने से यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट हो जाता है। बड़े जीव की सुरक्षा के लिए छोटे जीव को मारने में वे पाप बताते थे। खती को... Read More

गुरु तत्व का सम्मान 

Updated on 5 October, 2019, 6:00
जब भी तुमने बदले में किसी आशा के बिना किसी के किए कुछ भी किया हो, किसी को कोई सलाह दी हो, लोगों का मार्गदशर्न किया हो, उन्हें प्रेम दिया हो और उनकी देख-भाल की हो, तब तुमने गुरु की भूमिका निभाई है। गुरु  तत्व सम्मान करने की और विश्वास... Read More

जीवन में विचार की आवश्यकता

Updated on 4 October, 2019, 6:00
कुटिल एवं असत्य विचार से मुक्ति का सरल उपाय सुविचार की भावना दृढ़ करना है। शांतिदायक सुविचार की गंगा प्रवाहित करने पर ही हम मानसिक दुर्बलता से मुक्त हो सकते हैं। प्रत्येक विचार अंत:करण में एक मानसिक मार्ग का निर्माण करता है। हमारी समस्त आदतें ऐसे ही मानसिक मार्ग हैं,... Read More

उत्सव है बुद्धत्व 

Updated on 2 October, 2019, 6:00
बुद्धत्व मौलिक रूप से प्रांति है, विद्रोह है, बगावत है। काशी के पंडितों की सभा प्रमाणपत्र थोड़े ही देगी बुद्ध को! बुद्धपुरुष तुम्हें पोप की पदवियों पर नहीं मिलेंगे और न शंकराचायरें की पदवियों पर मिलेंगे। क्योंकि ये तो परंपराएं हैं। और परंपरा में जो आदमी सफल होता है, वह... Read More

दिव्यता की विविधता  

Updated on 30 September, 2019, 6:00
ईश्वर ने दुनिया की छोटी-छोटी खुशियां तो तुम्हें दे दी हैं, लेकिन सच्चा आनन्द अपने पास रख लिया है। उस परम आनन्द को पाने के लिए तुम्हें उनके ही पास जाना होगा। ईश्वर को पाने की चेष्टा में निष्कपट रहो। एक बार परम आनन्द मिल जाने पर सब-कुछ आनन्दमय है।... Read More

 गुरु की स्वीकार्यता  

Updated on 29 September, 2019, 6:00
हर वक्त संसार को गुरु की दृष्टि से देखो। तब यह संसार मलिन नहीं बल्कि प्रेम, आनन्द, सहयोगिता, दया आदि गुणों से परिपूर्ण, अधिक उत्सवपूर्ण लगेगा। तुम्हें किसी के साथ संबंध बनाने में भय नहीं होगा क्योंकि तुम्हारे पास आश्रय है। घर के अन्दर से तुम बाहर के वज्रपात, आंधी,... Read More