नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) गाड़ियों से सफर करने वाले आम लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की कीमतों में ₹1 प्रति किलोग्राम का इजाफा कर दिया है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। इस खबर को बिना किसी बाहरी मीडिया संदर्भ के, नए शब्दों और सबहेडिंग्स के साथ नीचे प्रस्तुत किया गया है:

दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के नए रेट लागू, 10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी

आज सुबह से प्रभावी हुई नई दरों के बाद देश की राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत बढ़कर ₹81.09 प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में अब ग्राहकों को प्रति किलो सीएनजी के लिए ₹89.70 का भुगतान करना होगा। इससे पहले तेल कंपनियों ने 15 मई को ₹2 और फिर 18 मई को ₹1 की बढ़ोतरी की थी।

विभिन्न शहरों में सीएनजी की नई दरें (रुपये/किग्रा) इस प्रकार हैं:

अंतरराष्ट्रीय संकट और सप्लाई रूट बाधित होना बनी मुख्य वजह

लगातार बढ़ रही कीमतों के पीछे मुख्य कारण वैश्विक मोर्चे पर उपजा तनाव है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी गंभीर संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एनर्जी कॉस्ट काफी बढ़ गई है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' रूट के बंद होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक दबाव के चलते सरकारी तेल कंपनियों के लिए घरेलू बाजार में पुरानी कीमतों को बरकरार रखना मुमकिन नहीं रह गया था।

कंपनियों का दैनिक घाटा ₹1600 करोड़ पार, इसलिए टुकड़ों में बढ़ रहे दाम

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर कच्चा तेल और गैस खरीदना पड़ रहा है। घरेलू बाजार में उस अनुपात में कीमतें न बढ़ने के कारण इन कंपनियों को रोजाना करीब ₹1,600 करोड़ का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा था। हालांकि, देश में खुदरा महंगाई को बेलगाम होने से रोकने के लिए सरकार ने कंपनियों को एक साथ बड़ी बढ़ोतरी करने की इजाजत नहीं दी है, यही वजह है कि कंपनियां ₹1 या ₹2 करके टुकड़ों में दाम बढ़ा रही हैं।

आम जनता की जेब पर सीधा असर और पीएम मोदी की 'वर्क फ्रॉम होम' की अपील

सीएनजी के महंगे होने का सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट और परिवहन लागत पर पड़ेगा। दिल्ली-एनसीआर में ऑटो, कैब (ओला/उबर), बसें और माल ढुलाई करने वाले वाहन मुख्य रूप से सीएनजी पर ही निर्भर हैं। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टर्स पर दबाव बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में यात्रा और माल भाड़ा महंगा होना तय है।

इसी बढ़ते ऊर्जा संकट और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन बचाने का आग्रह किया था। पीएम ने कंपनियों से अपील की थी कि वे अधिकतम 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) को बढ़ावा दें, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और कच्चे तेल की घरेलू मांग को घटाया जा सके।