भोपाल. 5 अगस्त को अयोध्या (Ayodhya) में होने जा रहे राम मंदिर भूमि पूजन (Ram Mandir bhoomi Poojan) को लेकर मेहमानों को निमंत्रण मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे दो प्रमुख नेताओं को भी अयोध्या आने का संदेश मिल गया है. यह दो नेता मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया (Jaibhan Singh Powaiya) हैं. दोनों ही नेताओं ने खुद यह जानकारी सार्वजनिक करते हुए लिखा है कि उन्हें 4 से 6 अगस्त के बीच अयोध्या में मौजूद रहने के निर्देश मिले हैं. उमा भारती ने ट्वीट कर जानकारी सार्वजनिक करते हुए लिखा कि मुझे राम जन्मभूमि न्यास के पदाधिकारियों ने निर्देश दिया है कि मैं 4 अगस्त से 6 अगस्त तक अयोध्या में मौजूद रहूं.वहीं, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने भी जानकारी सार्वजनिक करते हुए लिखा है कि मैं 3 अगस्त की सुबह अयोध्या प्रस्थान करूंगा. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास महाराज ने 4 से 6 अगस्त तक अयोध्या में रहने का आदेश दिया है. आपको बता दें अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन 5 अगस्त को होना है.

चंबल का जल पीताम्बरा पीठ की माटी जाएगी
बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने ऐलान किया है कि वो अपने साथ अयोध्या चम्बल का जल कलश और पीताम्बरा पीठ की पवित्र माटी लेकर जाएंगे. इसे वो मंदिर ट्रस्ट को सौपेंगे. इससे पहले उज्जैन से बाबा महाकाल की भस्म और क्षिप्रा नदी का जल भी अयोध्या भेजा जा चुका है. भूमिपूजन के लिए देश भर की नदियों का जल अयोध्या मंगाया गया है.

क्या रहेगा भूमिपूजन का कार्यक्रम ?
राम मंदिर के भूमि पूजन अनुष्ठान में सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए कुछ खास लोगों को ही आमंत्रित किया जा रहा है. इसमें राम मंदिर आंदोलन से जुड़े भाजपा के कुछ शीर्ष नेता और विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उच्च पदस्थ लोग शामिल हैं. इसके अलावा अयोध्या की कुछ बड़े साधु संत और काशी और अयोध्या के वह धार्मिक और वैदिक विद्वान भी मौजूद रहेंगे जो पूरे भूमि पूजन अनुष्ठान कार्यक्रम को विधि-विधान पूर्वक पूर्ण कराएंगे. इसके लिए सप्तपुरियों समेत देश के प्रमुख धार्मिक स्थानों की मिट्टी, जल और पहाड़ों की मिट्टी मंगाई जा रही है. अयोध्या के राम मंदिर के लिए भूमि पूजन अनुष्ठान की पूजा वैदिक रीति रिवाज से रामानंदी परंपरा के अनुसार संपन्न होगी. यह अनुष्ठान वैसे तो लगभग 5 से 6 घंटे चलेगा लेकिन इसमें वह 2 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होंगे, जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहेंगे. इसी के अनुसार पूरे भूमि पूजन कार्यक्रम को इस तरह आयोजित किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री जब अयोध्या राम जन्मभूमि परिसर पहुंचें तो उस समय भूमि पूजन अनुष्ठान का सबसे महत्वपूर्ण भाग संपन्न हो.