नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा पिछले दिनों राज्यसभा सांसदों की बैठक में सांसद राजीव सातव ने यूपीए-2 सरकार में मंत्री रहे कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की मौजूदा हालत का जिम्मेदार ठहराया था। बैठक के 2 दिन बाद शनिवार को यूपीए सरकार में मंत्री रह चुके मनीष तिवारी ने ट्वीट कर इशारों में राजीव सातव को जवाब दिया है। राजीव को जवाब देते हुए मनीष ने लिखा, बीजेपी 2004 से 2014 के बीच सत्ता से बाहर थी। इस दौरान उन्होंने कभी पूर्व पीएम वाजपेयी या उनकी सरकार को पार्टी की स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। 
उन्होंने लिखा, कांग्रेस में दुर्भाग्य से कुछ बीमार लोगों ने डॉ.मनमोहन सिंह से लड़ना शुरू कर दिया। अभी जब साथ मिलकर चलने का वक्त है,तब विभाजन जैसी सोच पाल रहे हैं। मनीष तिवारी के ट्वीट के बाद राजीव सातव ने भी ट्वीट किया है। राजीव ने अपने ट्वीट में लिखा, मत पूछ मेरे सब्र की इन्तेहा कहां तक है तु सितम कर ले, तेरी ताकत जहां तक है,वफा की उम्मीद जिन्हें होगी, उन्हें होगी हमें तो देखना है, तू जालिम कहां तक है। सूत्रों के अनुसार सोनिया गांधी के द्वारा बुलाई बैठक में सांसदों के साथ जो बैठक की थी उसमें राजीव सातव ने खुलकर उन नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोला जो यूपीए-2 सरकार में मंत्री थे। राजीव के इस मोर्चे से कई वरिष्ठ नेता नाराज भी हैं। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस के कई युवा नेता बिना फैक्ट के बात करते हैं। वहां यूपीए सरकार पर निशाना साध रहे हैं, उस समय कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी थी। यूपीए की चेयरपर्सन भी सोनिया गांधी थी।यूपीए सरकार के दौरान राहुल गांधी पहले कांग्रेस के महासचिव और फिर 2013 में कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। अगर युवा नेता पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मंत्रियों पर उंगली उठा रहे हैं,तब कुछ उंगलियां उनके नेतृत्व पर भी उठ रही है। 
ग़ौरतलब है कि 2014, 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर कांग्रेस के युवा और वरिष्ठ नेता कई बार आमने-सामने आए। पार्टी में जनरेशन क्लैश कई बार दिखा और पार्टी इससे लगातार कमजोर होती जा रही है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) कई राजनीतिक पार्टियों का गठबंधन है, जिसकी अगुवाई कांग्रेस करती है। 2004 से 2014 तक यूपीए की ही सरकार केंद्र में थी।